Friday, September 18, 2009

दूर छलकते बादल
लाये पैगाम बरसात का
उस मीठी सुबह ने किया
सुहाना अंत उस रात का ॥

सुबह की महेकती हवा
जाने कितने गीत गुनगुनाये
कुछ इनमें थे सुने सुने
और कई समझ भी न पाये ॥

सुन इन गीतों को
मन में जागे कई ख्याल
अनकहे अनसुने
दिल के कुछ सवाल ॥

खयालो सवालों में मैंने
मन को जाने कब खो दिया
इतने में जाने क्यो
आसमानभी रो दिया ॥

रिमझिम रिमझिम बरसात ने
ये एहसास दिला दिया
खयालो की दुनिया से मुझे
हकीकत में ला दिया ॥

जाते जाते भी दिल मुझसे
जाने क्या क्या कह गया
शायद वोह भी कहीं आसमान की तरह
रोता ही रह गया
रोता ही रह गया ॥

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