Monday, January 25, 2016

पहले प्यार का एहसास

याद है मुझे आज भी
वो पहले प्यार का एहसास
धुप भी छाओं सी लगती थी
ना भूख ना प्यास।


खुश खुश सा रहता था मन्न
गर्मी भी ठण्ड का एहसास देती,
चेहरे पे मुस्कान रोके न रूकती थी
जब वो मेरा नाम ले मुझे आवाज़ देती।

रातों को जाग जाग
उसकी एक एक अदा याद आती।  
वो उसका मुस्कुराना,
धीरे से अपने बालों को सहलाना,
और कभी मुझे देख मुस्कुरा कर पलट जाती।

दिल हमेशा उमंगो से भरा रहता,
लगता था  सब कुछ हासिल है।
कहता था दिल मुझसे, जीत ले दुनिया
हाँ, तू इस क़ाबिल है।

मुश्किल लगता था कुछ,
तो वो था उससे इज़हार करना।
प्यार तो करता था बहुत मैं,
मुश्किल था लेकिन उस प्यार का इकरार करना।

फिर एक दिन हिम्मत जोड़ कह दिया मैंने,
थोड़ा हकला कर थोड़ी सहमी सी आवाज़ में।
उस दिन डर का सामना कर रहा था,
कहीं रोक न दे वो मुझे प्यार के इस आगाज़ में। 

थोड़ा सोच कर, मुस्कुरा दी वो,
थोड़ा शर्माते हुए,
थोड़ा घबराते हुए,
झील सी गहरी आँखें झुका कर,
अपनी प्यार भरी मीठी सी मुस्कान।

याद है मुझे आज भी,
इकरार करती उसकी धीमी सी आवाज़।
हाँ, याद है मुझे आज भी,
वो पहले प्यार का एहसास। 

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